Veer Sipahi Bikaner India

Veer Sipahi Bikaner

Veer Sipahi

 

वीर सिपाही बीकानेर

Veer Sipahi Bikaner

 

 

 

सिन्धी -सिपाही  समाज  के  उद्देश्य :
1. समाज के गोव मोहल्ले  और बस्तियों के विकास कार्यो को गति प्रदान करना और स्वछता स्वास्थ्य तथा पर्यावरण को शुद्ध  रखने  की  प्रवर्ती  का  विकास  करना .
2. समाज  के प्रत्तेक  परिवार के सदस्य को दीनी और दुनिया की तालीम हासिल करने के लिए प्रेरित करना.
3. समाज के प्रत्तेक परिवार को रोजगारन्मुख बनाने  के लिए प्रेरित और प्रोत्साहीत  करना.

4.समाज  में  फैली  सामाजिक  कुरीतियों को दूर करने  का  वातावरण  तैयार करना.
5. समाज के लोगों में अपने अधिकारों और समस्याओं के निराकरण के प्रति सजग रहने की जागरूकता पैदा करना और संघर्ष  करने की प्रेरणा देना.
6.सामाजिक उत्थान  और विकास के लिए साहित्यिक सांस्कृतिक एंव मनोरंजनात्मक विवध गतिविधियों एंव कार्यक्रमों का आयोजन करना.
7.सामाजिक भलाई एंव सेवा कार्यों के लिए रुची पैदा करना व समाज कल्याण के लिए संस्थाओं के निर्माण करने एंव समाज सुधर का आदर्श प्रस्तुत करने वाले व्यक्तियों का सम्मान करना.
8.रास्ट्रीय  एकता एंव भाईचारे की भावना पैदा करने वाले कार्यक्रमों का आयोजन करना.

Published by

Sadik Khan Panwar

Mob.+919982353821

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mohammadsadikpanwar@gmail.com

 

 

 



 

   History of Muslim Sipahi Samaz  मुस्लिम सिपाही समाज का इतिहास


मारवाड़ मैं मुसलमान राजपूत जगह जगह पाए जाते है.ये सिपाही कहलाते हैं.इनमे हर कौम के राजपूत शामिल है.जो मुसलमानी राज में मुसलमान बनाये गए थे.राजपूतों को मुसलमान बनाने का सिलसला लगभग मुहम्मद बिन कासिम  की चढ़ाई से संवत 770 के करीब अरब की तरफ से सिंध के ऊपर लड़ाई  से हुई थी.से शुरू हुआ था.जिसका खात्मा औरंगजेब के मरने पर संवत 1762 में हुआ.इस 1000 बरस के अरसे में लाखों राजपूत मुसलमान कर दिए गए.शुरू  शुरू मैं जबकि अरबों और तुर्कों मैं हमले होते थे तो यह कायदा था की फ़तेह होने के पीछे आम हिंदुवो और खास कर राजपूतों और दूसरी लड़ने वाली कोमों के आदमियों को या तो मुसलमान कर देते थे या मार डालते थे.की जिससे वे मुकाबला करने लायक न रहे.उस वक़्त राजपूत कौम में जो लड़ाई में हारकर फिर मुकाबला नहीं कर सकते थे,जान बचाने  की दो ही सूरतें थी.या तो मुसलमान हो जाते थे या राजपूती छोड़ करके कमीन जातों में मिल जाते थे. और उन्हीं  का कसाब भी करने लगते थे.आज जो हर कौम में राजपूतों की खान्पें  पाई जाती है वे उन्ही दिनों में मुसलामानों के दबाब से उन मैं शामिल हुई थी. और जो मुसलमान हो जाते थे उनको सिपाहियों में  नोकरी मिल जाती थी.यही लोग जिनकी औलाद कहीं देस्वाली पठान ,कहीं रंधर ,कहीं मुसलमान राजपूत,कहीं सिन्धी सिपाही और कहीं देसवाली   कहलाती है

मारवाड़ राजस्थान में मुस्लिम  राजपूतो के कई थोक है.मगर ये चार बड़े थोक है और सब अपनी असली खांप के नाम से सिपाहियों में जाने जाते है.

1.सिन्धी जो पश्चिम मारवाड़ में होते है

2.देशवाली जो पूर्व मारवाड़ में हर जगह होते है

3.नायक ये जोधपुर मे ज्यादा है

4.क्यामखानी ये चौहान भी जाने जाते है और नागौर,डीडवाना की तरफ बहुत है

सिपाही समाज के इतिहास पर एक नज़र डालने पर ये ज्ञात हुआ की बुजुर्गो के कहे अनुसार समाज के बही-भाट,लंगे,ख्यात और प्राचीन राजघराने से जुड़े परिवारों से सिपाही समाज की जानकारी मिलती है आज भी सिपाही समाज की विभिन जातियों के बही-भाट,जोबनेर के पास आसलपुर से आते है इन भाटो के पास सिपाही समाज का पूरा इतिहास है सिपाही समाज के ज्यादातरलोग जैसलमेरऔर सिंध से आकर राजस्थान के विभिन हिस्सों(राज्यों ) में बस गए.जिन्हें कही सिन्धी,कही सिपाही और दुसरे नामो से भी जाना जाता है बीकानेर में भी सिपाही समाज का एक संगठन है जो समाज की ऐतिहासिक प्रस्ठभूमि पर काम कर रहा है जिन्हें प्रगतिशील सिपाही समाज और प्रगतिशील सिन्धी सिपाहीसमाज कहा जाये तो कोई फर्क नहीं होगा क्योंकि ये संगठन सिन्धी-समाज की जातियों का ही प्रतिनिधि है इस जाति का मूल नाम सिपाही है तो इस जाति का इलाकाई और भोगोलिक नाम सिन्धी है. सिन्धी-सिपाही एक-दुसरे के पर्याय है बाड़मेर से गंगानगर के इलाके तक बसे लोग कही अपने भोगोलिक नाम से जाने जाते है तो कही अपने मूल नाम से जाने जाते है दरअसल में इस जाति के भोगोलिक और मूल नाम को जोड़कर देखा जाये तो इन पूरी जातियो का नाम सिन्धी सिपाही है जो सिंध से आकर बाड़मेर से गंगानगर रिडमलसर बीकानेर तक में बसी हुई है इनकी सभी उपजातियां सामान है और आपस में शादी-ब्याह होते है गंगानगर,हनुमानगढ़ के राठी इलाके में बसी इस जाति को इलाके के लिहाज से राठ कहा जाता है. सिन्धी सिपाही समाज की ऐतिहासिक जानकारी पर अभी शोध जारी है मूल रूप से सिन्धी सिपाही एक ही नस्ल और जाति है.

 

Rajput Muslims are found in many places in Rajasthan India and Pakistan. They are called Sipahi who converted their religion during reign of the Muslim Kings in India included different sub caste of Rajput. The Conversion of Rajput into Muslim started when Mohammad Bin Kasim attacked Sindh from Arab in 770 and it ended when Aurangzeb died in 1762.during these thousand years hundred billion of Rajput was converted into Muslim. Whenever there was any invasion of The Arabs and The Turks it was in tradition that after winning war either Rajput especially warrior used to be killed or converted into Muslim so that they might not be able to fight. There was only two ways for Rajput who was unable to fight to save their lives either convert into Muslim or mixed their caste into lower caste of the Hindus and some of them started to use their sub caste. Which are also found now a day in lower caste Hindus. All these sub castes of Rajput which are found in different caste and religion are originally from Rajput who were converted during the reign of The Muslims and whoever converted into Muslim were given service in the kingdom as a soldier (Sipahi).  Now they are called Deshwali Pathan ,Randhar, Muslim Rajput, Sindhi Sipahi ,Deshwali etc. according to places. most of these Muslim write their names with Rajput in Pakistan. After study the history of Sipahi Samaz and from the books of our ancestors we have come to know that most of people of Sipahi Samaz came from Sindh (now in Pakistan) and settled at different places  in Rajasthan i.e. Bikaner.,Sriganganagar,.Jaisalmer,Barmer. The research about the history of Sipahi Samaz is continued still now.

 By: Sadik Khan Panwar

द्वारा:

हिंदी अनुवादन

सदीक खान पंवार

७ क १० पवनपुरी साउथ बीकानेर

स्रोत :

वीर सिपाही स्मारिका

Source:

www.ridmalsar.webs.com

www.veersipahi.wordpress.com

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